मानवता को झकझोरने वाली घटना, हक़ की लड़ाई में बर्बरता अस्वीकार्य : नगेन्द्र नेगी

महिला पुलिसकर्मी के साथ अमानवीय व्यवहार पर कांग्रेस का तीखा विरोध

रायगढ़ | तमनार क्षेत्र में ड्यूटी पर तैनात एक महिला पुलिसकर्मी के साथ हुई बर्बर और शर्मनाक घटना ने पूरे जिले को स्तब्ध कर दिया है। इस अमानवीय कृत्य को लेकर जिला कांग्रेस कमेटी के ग्रामीण अध्यक्ष नगेन्द्र नेगी ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।

कांग्रेस के प्रभारी महामंत्री दीपक मंडल द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति में बताया गया कि नगेन्द्र नेगी ने इस घटना को कायरता की पराकाष्ठा बताते हुए कहा कि जल, जंगल और ज़मीन के अधिकारों के लिए संघर्ष कांग्रेस की वैचारिक प्रतिबद्धता है और यह संघर्ष हर परिस्थिति में जारी रहेगा, लेकिन आंदोलन की आड़ में किसी महिला के सम्मान पर हमला करना घोर निंदनीय है।

उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि आक्रोश और असहमति लोकतंत्र का हिस्सा हो सकते हैं, लेकिन किसी महिला को सार्वजनिक रूप से अपमानित करना, उसके साथ मारपीट करना या उसके आत्मसम्मान को ठेस पहुँचाना किसी भी रूप में स्वीकार्य नहीं है। यह कृत्य सभ्य समाज के माथे पर कलंक है। नगेन्द्र नेगी ने इस पूरी घटना के लिए शासन-प्रशासन की लापरवाही और हठधर्मिता को भी जिम्मेदार ठहराया।




निष्पक्ष और उच्च स्तरीय जांच की मांग

जिला कांग्रेस अध्यक्ष ने इस संवेदनशील मामले में निष्पक्ष एवं उच्च स्तरीय जांच की मांग करते हुए कहा कि घटना में शामिल प्रत्येक व्यक्ति की पहचान कर उन्हें कानून के तहत कठोरतम सजा दी जानी चाहिए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

उन्होंने कहा कि पीड़ित महिला पुलिसकर्मी को न्याय दिलाना प्रशासन की सर्वोच्च जिम्मेदारी है और इस प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की ढिलाई या पक्षपात बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।




शांतिपूर्ण आंदोलन को हिंसक बनाने के पीछे कौन जिम्मेदार?

तमनार में जिंदल प्रबंधन की जनसुनवाई को लेकर चल रहे आंदोलन को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। नगेन्द्र नेगी ने सवाल उठाया कि जो आंदोलन पिछले 16 दिनों से पूर्णतः शांतिपूर्ण और गांधीवादी तरीके से चल रहा था, वह अचानक हिंसा की आग में कैसे झोंक दिया गया?

उन्होंने इस पूरे घटनाक्रम को प्रशासन की गंभीर विफलता बताते हुए जिंदल प्रबंधन की भूमिका पर भी सवाल खड़े किए। कांग्रेस जिलाध्यक्ष का आरोप है कि 27 दिसंबर को हुई घटना एक सोची-समझी साजिश के तहत रची गई, ताकि ग्रामीणों के शांतिपूर्ण आंदोलन को बदनाम किया जा सके।

उन्होंने मांग की कि हिंसा की परिस्थितियां पैदा करने वाले जिंदल प्रबंधन और मौके पर मौजूद जिम्मेदार प्रशासनिक अधिकारियों के खिलाफ उच्च स्तरीय जांच कर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए और दोषियों पर मामला दर्ज किया जाए।

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